मातृभूमि भारत | Maatrbhoomi Bhaarat.


प्रत्येक भारतीय को यह देश प्राणों से भी प्यारा है | इसका कण कण पवित्र है| तभी तो प्रत्येक भारतीय गाता है , कण-कण में सोया शहीद, पत्थर-पत्थर इतिहास है|’’ इस भूमि पर पग-पग में उत्सर्ग और शोर्य का इतिहास अंकित है | इसके स्वरूप का वर्णन वाणी व लेखनी द्वारा असम्भव है, फिर भी माता के पुत्र होने के नाते हमें इसके भव्य-दिव्य स्वरूप का अधिकाधिक ज्ञान प्राप्त करना चाहिए | अपनी इस महिमामयी, पवित्र मातृभूमि के भारतवर्ष, आर्यावर्त, भरत-खण्ड, हिंदुस्तान आदि अनेक नाम हैं | अपनी मातृभूमि के प्रति कितनी श्रद्धा होती है वहाँ के रहने वालों में! क्यों न हो? माँ के जीवन का ही अंश उसकी संतान हैं-तभी मातृभूमि के पुजारी गाते हैं-
सुंदर होंगे देश बहुत से, बहुत बड़ी है यह धरती|
पर अपनी माँ तो अपनी है, अमित प्यार है जो करती||
इच्छा है इस का जनभूमि पर शत-शत बार जन्म लें हम|
शत-शत बार इसकी सेवा में अपना जीवन दें हम||
पूर्व काल में अपनी मातृभूम की सीमाओं के अंतर्गत पूर्व में ब्रह्म देश, पश्चिम में पाकिस्तान तथा अफगानिस्तान (उप-गणस्थान), उत्तर में तिब्बत, तथा दक्षिण में श्रीलंका आदि देश सम्मिलित थे |
सन 1947 ई० में स्वतंत्रता प्राप्ति के साथ साथ आधा पंजाब, सिन्ध एवं बिलोचिस्तान तथा सीमा प्रांत पशिचमी पाकिस्तान के रूप में और पूर्वी बंगाल पूर्वी पाकिस्तान (बंगला देश) के रूप में अलग कर दिये गए |
वंदे जननी भारत धरणी, शस्य-श्यामला प्यारी
नमो-नमो सब जग की जननी, कोटि-कोटि सुत वारी||”
हम कितने सौभाग्यशाली हैं कि हमारा जन्म उस पुण्य भूमि भारत में हुआ, जहाँ देवता भी जन्म लेने के लिए लालायित रहते हैं । कितनी महिमामयी है यह मातृभूमि, जिसकी गौरवमंडित संस्कृति ने सम्पूर्ण विश्व को अपने ज्ञान से आलोकित कर इसको विश्व गुरु का गौरव प्रदान किया । उत्तर में अडिग-प्रहरी नगाधिराज हिमालय के उत्तुंग भाल पर भगवान शंकर का कैलाश, जन-मन को मोहित करने वाली विश्व कि अत्युतम झील मानसरोवर’, ललाट में स्थित प्रथ्वी के स्वर्ग कश्मीर की अनुपम छटा मध्य प्रदेश में करधनी भाँति सुशोभित विन्ध्याचल पर्वतमालाएँ तथा दक्षिण में अहर्निश माँ के चरणों का प्रक्षालन करती हिंद महासागर की उत्ताल तरंगें और वहीं पर विश्व को भारतीय संस्कृति का गौरवमंडित ज्ञानप्रकाश देने वाली स्वामी विवेकानंद की पुण्य-स्मृति का जाग्रत केंद्र कन्याकुमारी, ये सब प्रकृति के अद्वितीय उपहार हैं । भारत का विशाल हृदय विश्व कि समस्त ऋतुओं को सँजोए है । ऋतु अनुरूप खान-पान, वेश-भूषा कि विभिन्नता तथा असीम ज्ञान का दिग्दर्शन कराती अनेक भाषाओं का संगम इस देश में है, अनेकानेक मत-मतांतरों को आत्मसात करता हुआ विश्व का प्राचीनतम राष्ट्र यह भारत वर्ष ही है, जो हमें अनेक महापुरुषों एवम उनकी तपस्या से स्थापित उन मन-बिन्दुओं का सहज कि स्मरण कराता है, जिनके कारण हमारी एकात्मता अक्षुण्ण है । 
मातृभूमि भारत | Maatrbhoomi Bhaarat. मातृभूमि भारत | Maatrbhoomi Bhaarat. Reviewed by Ritik Mishra on Tuesday, July 30, 2019 Rating: 5

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